By | September 8, 2021
वाच्य किसे कहते हैं ? What is Voice

आप जानते हैं वाच्य किसे कहते हैं ? तो आज हम आपको ” वाच्य किसे कहते हैं ” के बारे मैं जानकारी देने बाले हैं। जिससे आपको वाच्य किसे कहते हैं पता चलेगा। तो आइये जानते हैं “ वाच्य किसे कहते हैं”

वाच्य किसे कहते हैं ?

क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि उसका मुख्य विषय क्या है — कर्ता , कर्म या भाव । ” अर्थात् क्रिया के जिस रूप से उसके कर्ता , कर्म या भाव के अनुसार होने का बोध होता है . उसे ‘ वाच्य ‘ कहते हैं ।

नीचे लिखे वाक्यों पर गौर करें :

विश्लेषण : उपर्युक्त सभी उदाहरणों में यही देखा जा रहा है कि क्रिया कर्ता के अनुसार अपना रूप बदल रही हैं ; कर्म का उसपर कोई असर नहीं पड़ रहा है , चाहे वह पु . हो या स्त्री ; एकव . हो या बहुव . । साथ ही यह भी देखा जा रहा कि इस तरह के वाक्यों में अकर्मक एवं सकर्मक दोनों प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग होता है ।

उपर्युक्त दोनों वाक्यों में हम देखते हैं कि क्रिया का प्रयोग कर्मानुसार होते हुए भी कर्ता को ही विषय बनाया गया है यानी कर्ता के बारे में ही कहा गया है न कि कर्म के बारे में भले ही क्रिया का रूप कर्म के अनुसार हुआ है ।

नोट : कुछ वैयाकरण प्रमवश इस तरह के वाक्यों को कर्मवाच्य का मान बैठते हैं । यहाँ में स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि क्रिया का यह रूप जिससे यह पता चले कि वह कर्ता , कर्म या भाव का अनुगमन करता है प्रयोग ‘ कहलाता है ।

प्रयोग तीन प्रकार के होते हैं:

  • कतार प्रयोग : कर्ता की अनुगामिनी किया
  • कणि प्रयोग : कर्म की अनुगामिनी क्रिया
  • भावे प्रयोग : किया भाव की अनुगामिनी अर्थात् स्वतंत्र प्रयोग

इस दृष्टि से उक्त दोनों उदाहरणों में क्रिया प्रयोग दिखाया गया है न कि वाच्य प्रयोग ।

वाच्य के कितने रूप है ?

वाच्य के तीन रूप है :

1.कर्तृवाच्य:

जिसमें कर्ता प्रधान हो , कर्म ( यदि रहे तो ) गौण और क्रिया कर्ता के लिंग से प्रभावित हो । इस वाच्य में अकर्मक एवं सकर्मक दोनों प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग होता है । प्रथम छ वाक्य कर्तृवाच्य ( Active Voice ) के हुए।

2.कर्मवाच्य :

इसमें कर्म प्रधान होता है , कर्ता गौण और क्रिया कर्म के लिंग – वचन और पुरुष से प्रभावित होती है । कर्मवाच्य ( Passive Voice ) में कर्म को ही विषय बनाया जाता है । उदाहरण नं . 7 में हम यही पाते हैं । कर्मवाच्य में केवल सकर्मक क्रियाओं का ही प्रयोग होता है ।

3. भाववाच्य :

जिस वाक्य की क्रिया का संबंध कर्ता और कर्म से न होकर भाव से होता है , ‘ भाववाच्य ‘ ( Impersonal Voice ) कहलाता है । इस वाच्य में भाव की ही प्रधानता होती है । इस कारण से क्रिया सदैव स्वतंत्र रहती है । स्वतंत्र रहने के कारण क्रिया अन्य पुं . , पुं ० और एकवचन में रहती है ।

भाववाच्य की क्रिया सामान्यतया अकर्मक होती है , किन्तु यदि कर्ता और कर्म दोनों अपने चिह्नों से युक्त रहें तो वैसी स्थिति में स्वभावतः सकर्मक क्रिया भी रहती है ; लेकिन क्रिया उन दोनों ( कर्ता और कर्म ) से अप्रभावित रहती है ।

वाच्य – परिवर्तन कैसे होता हैं ?

1. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य ( Active to Passive )

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में रूपान्तरण के लिए हमें निम्नलिखित कार्य करने चाहिए

  1. कर्ता कारक में करण कारक के चिह्न ‘ से / द्वारा ‘ का प्रयोग करना चाहिए ।
  2. . कर्म को चिह्न – रहित करना चाहिए ।
  3. क्रिया को कर्म के लिंग – वचन – पुरुष के अनुसार रखना चाहिए अर्थात् कर्म प्रधान बनाना चाहिए ।

नीचे लिखे उदाहरणों को देखें :

कर्तृवाच्य कर्मवाच्य
1. सचिन मैच खेलने चेन्नई जाएँगे । सचिन के द्वारा मैच खेलने चेन्नई जाया जाएगा ।
2. राकेश पुस्तक पढ़ रहा है । राकेश के द्वारा पुस्तक पढ़ी जा रही है ।
3. मित्र विपत्ति में मदद करते हैं । मित्रों के द्वारा विपत्ति में मदद की जाती है ।
4. रमेश पत्र लिखता है । रमेश के द्वारा पत्र लिखा जाता है ।
5. फैक्टरी बंद कर दी । फैक्टरी बंद करा दी गई ।
6. बुढ़िया खाना नहीं खा सकती । बुढ़िया के द्वारा खाना नहीं खाया जाता है ।

2. कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य ( Passive to Active )

कर्मवाच्य से कर्तृवाक्य में परिवर्तन के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए –

1. कर्ता के अपने चिह्न ( ० , ने ) आवश्यकतानुसार लगाना चाहिए । 2. यदि वाक्य की क्रिया वर्तमान एवं भविष्यत् की है तो कर्तानुसार क्रिया की रूप रचना रखनी चाहिए । 3 . भूतकाल की सकर्मक क्रिया रहने पर कर्म के लिंग , वचन के अनुसार क्रिया को रखना चाहिए ।

नोट : मूल रूप से कर्ता को ही विषय बनाना चाहिए ।

नीचे लिखे उदाहरणों को देखें और समझें :

कर्तृवाच्य कर्मवाच्य
1 . गोपाल पत्र लिखता है । गोपाल से पत्र लिखा जाता है ।
2 . मैं अखबार नहीं पढ़ सकता । मुझसे अखबार पढ़ा नहीं जाता ।
3 . छात्र पत्र लिखते हैं । छात्रों द्वारा पत्र लिखे जाते हैं ।
4. लड़कियाँ गीत गा रही हैं । लड़कियों द्वारा गीत गाए जा रहे हैं ।
6. सुमित ने कविता पढ़ी । सुमित द्वारा कविता पढ़ी गई ।

3. कर्तृवाच्य से भाववाच्य ( Active voice to Impersonal Voice )

कर्तृवाच्य से भाववाच्य में परिवर्तन करने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए –

  1. कर्ता के साथ से / द्वारा चिह्न लगाकर उसे गौण किया जाता है ।
  2. मुख्य क्रिया को सामान्य क्रिया एवं अन्य पुरुष पुल्लिंग एकवचन में स्वतंत्र रूप में रखा जाता है ।

नोट : हिन्दी में प्रायः निषेधवाचक भाववाच्यों का ही प्रचलन है ।

3 . भाववाच्य में प्रायः अकर्मक क्रियाओं का ही प्रयोग होता है ।

नीचे लिखे उदाहरणों को देखें और समझें –

कतवाच्य भाववाच्य
1. गरमियों में लोग खूब नहाते हैं गरमियों में लोगों से खूब नहाया जाता है ।
2. पक्षी रात में सोते हैं । पक्षियों से रात में सोया जाता है ।
3. उमेश हँसा । उमेश से हँसा गया ।
4. हमलोग रोज नहाते हैं । हमलोगों से रोज नहाया जाता है ।
5. मैं गा नहीं सकता । मुझसे गाया नहीं जाता ।

वाच्य – संबंधी कुछ विशिष्ट बातें :

कर्तृवाच्य के सकारात्मक वाक्यों में इसी सामर्थ्य को सूचित करने के लिए क्रिया के साथ ‘ सकना ‘ का प्रयोग किया जाता है । जैसे –

हम पुस्तक पढ़ सकते हैं ।

वे गीत गा सकते हैं ।

असमर्थता सूचक में भी ‘ सकना ‘ का प्रयोग किया जाता है । जैसे –

वह काम नहीं कर सकता ।

अंशु गाना नहीं गा सकती ।

कर्मवाच्य के वाक्यों में प्रायः क्रिया में + ‘ जा ‘ रूप लगाया जाता है । जैसे –

किया जाता है । किया गया । किया जाएगा ।

खाया जाता है । खाया गया । खाया जाएगा ।

कुछ व्युत्पन्न अकर्मक क्रियाओं का प्रयोग भी देखा जाता है । जैसे –

बढ़ई पेड़ नहीं काट रहे ।

बढ़ई से पेड़ काटा नहीं जाता ।

बढ़ई से पेड़ कट नहीं रहा ।

अकर्तृवाच्य ( कर्मवाच्य और भाववाच्य ) के वाक्यों में कहीं – कहीं कर्ता का लोप कर दिया जाता है । जैसा –

पेड़ नहीं काटा जा रहा ।

पेड़ नहीं कट रहा ।

हिन्दी में क्रिया का एक ऐसा रूप भी है , जो कर्मवाच्य की तरह प्रयुक्त होता है । जैसे –

कुर्सी टूट गई । ( ‘ तोड़ना ‘ से ‘ टूटना ‘ )

दरवाजा खुल गया । ( ‘ खोलना ‘ से ‘ खुलना ‘ )

क्रिया के अचानक तथा स्वतः होने की स्थिति में कर्मवाच्य का प्रयोग होता है । जैसे –

बस पलट गई और कई यात्री मारे गए ।

कई लाशें बहा दी गईं ।

कार्यालयी भाषा प्रायः कर्मवाच्य में देखी जाती है । जैसे –

आप पर क्यों नहीं अनुशासनात्मक कार्यवाई की जाय ?

आपको इस साल का बोनस दिया जाता है ।

आपको सूचित किया जाता है ।

अधिकार , अभिमान और अहंभाव प्रकट करने के लिए कर्मवाच्य की क्रिया का प्रयोग होता है । जैसे –

नर्तकियों को नचाया जाय ।

कर्मचारियों से सफाई कराई जाए ।

सूचना , विज्ञप्ति आदि में जहाँ कर्ता निश्चित हो वहाँ कर्मवाच्य की क्रिया देखी जाती है । जैसे –

बैरीयर के गिरे रहने पर रेलवे लाईन को पार करनेवालों को सजा दी जाएगी ।

कन्या – भ्रूण हत्या करनेवालों को जेल दी जाए ।

भाववाच्य में जब ‘ नहीं ‘ का प्रयोग न हो तो मूल कर्ता जन सामान्य होता है । जैसे –

गर्मियों में छत पर सोया जाता है ।

अनुमति या आदेश प्राप्त करने की स्थिति में भाववाच्य की क्रिया का प्रयोग होता है । जैसे-

अब यहाँ से चला जाय । यात्रा पर निकला जाय ।

भाववाच्य की क्रिया सदा पु . एकव . अन्य पुरुष में ही रहती है , उसपर कर्ता के लिंग वचन – पुरुष का कोई असर नहीं पड़ता ।

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